Breaking News
राष्ट्रीय एकता दिवस पर CM धामी का बड़ा ऐलान, पीआरडी जवानों का बढ़ेगा मानदेय; हर ग्राम पंचायत में बनेगा मुख्यमंत्री खेल क्लब
प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों को दी दिवाली की सौगात, जारी की पीएम किसान की 24वीं किस्त
बदरीनाथ से लौट रहा हेलीकॉप्टर जोशीमठ के पास क्रैश, छह लोग थे सवार
बर्फ की सफेद चादर में लिपटी बाबा केदार की नगरी, श्रद्धालु खुश, बढ़ी ठिठुरन
बदरीनाथ धाम की चोटियों पर बर्फबारी, मनमोहक नजारे देख खिले श्रद्धालुओं के चेहरे
लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव-2026 का समापन, धामी ने किया साहित्यिक पुस्तकों का विमोचन
करवा चौथ पर महिला कार्मिकों को सार्वजनिक अवकाश, सीएम धामी के निर्देश पर शासन ने जारी किया आदेश
सड़क मार्ग से देहरादून रवाना हुए सीएम धामी, रास्ते में सड़क का किया निरीक्षण
गैरसैंण में विकास को नई गति, 7,844 करोड़ के अनुपूरक बजट का प्रस्ताव

ऋषिकेश के बजरंग सेतु पर ग्लास डेक पर चलने के लिए देना होगा शुल्क, वयस्कों से ₹100, बच्चों से ₹50

ऋषिकेश। लक्ष्मणझूला के समीप स्थित नव निर्मित बजरंग सेतु पर अब कांच (ग्लास डेक) वाले हिस्से पर चलने के लिए पर्यटकों और श्रद्धालुओं को शुल्क देना होगा। हालांकि, पुल के सामान्य डामर वाले हिस्से से आवागमन पहले की तरह पूरी तरह निशुल्क रहेगा।

लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) नरेंद्र नगर के अधिशासी अभियंता प्रवीण कुमार के अनुसार, 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए 100 रुपये और 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों एवं किशोरों के लिए 50 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।

उन्होंने बताया कि ग्लास डेक पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है। इस हिस्से की नियमित सफाई, सुरक्षा, तकनीकी निरीक्षण और मरम्मत पर होने वाले खर्च को ध्यान में रखते हुए यह उपयोगकर्ता शुल्क लागू किया गया है। शुल्क से प्राप्त राशि का उपयोग केवल सेतु के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था पर किया जाएगा।

करीब 132.30 मीटर लंबा और 8.60 मीटर चौड़ा बजरंग सेतु आधुनिक तकनीक से निर्मित है। पुल के दोनों ओर पैदल यात्रियों के लिए पांच परतों वाले टफेंड ग्लास से बने विशेष फुटपाथ तैयार किए गए हैं, जबकि बीच का हिस्सा सामान्य आवाजाही के लिए रखा गया है।

ग्लास डेक से गंगा और आसपास के प्राकृतिक दृश्यों का मनोरम नजारा देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। विभाग को उम्मीद है कि शुल्क लागू होने के बाद भी लोगों का उत्साह बरकरार रहेगा और इससे सेतु के बेहतर रखरखाव में मदद मिलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top