मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों, सीमांत क्षेत्रों की सामरिक महत्ता, तीर्थाटन, पर्यटन और आपदा प्रबंधन की आवश्यकताओं को देखते हुए आधुनिक एवं सुदृढ़ सड़क नेटवर्क का विकास राज्य की प्राथमिकता है। उन्होंने लंबित परियोजनाओं पर शीघ्र स्वीकृति और क्रियान्वयन का आग्रह किया।
बैठक में केंद्रीय सड़क अवसंरचना निधि (CRIF) के तहत वर्ष 2026-27 के लिए लगभग ₹750 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी देने पर सहमति बनी। वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग (NHO) के अंतर्गत लगभग ₹2,966 करोड़ की पांच प्रमुख परियोजनाओं को भी स्वीकृति मिली। इनमें श्रीनगर बाईपास, पुरकाजी-लक्सर-हरिद्वार फोरलेन, लोहाघाट एवं पिथौरागढ़ बाईपास, मझोला-खटीमा फोरलेन विस्तार तथा रामनगर-रानीखेत (मोहन) मार्ग का सुदृढ़ीकरण शामिल हैं।
मुख्यमंत्री के अनुरोध पर हरिद्वार बाईपास और कोटद्वार बाईपास परियोजनाओं को भी सहमति प्रदान की गई। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों को स्पर मार्गों से जोड़ने के लिए लगभग ₹3,000 करोड़ की परियोजनाओं तथा अल्मोड़ा सिकुड़ा बैंड-एनएच-309 टनल परियोजना (लगभग ₹300 करोड़) पर भी सैद्धांतिक सहमति व्यक्त की गई।

बैठक में उत्तराखंड लैंडस्लाइड मिटिगेशन मैनेजमेंट सेंटर (ULMMC) के माध्यम से भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों के उपचारात्मक कार्यों के लिए डीपीआर तैयार करने हेतु एमओयू को भी मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने सीमा सड़क संगठन (BRO) से संबंधित लंबित परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति देने और पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण कार्यों को गति देने के लिए आवश्यक प्रक्रियात्मक संशोधनों का भी अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से इन परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन से उत्तराखंड में सड़क संपर्क और आधारभूत संरचना को नई मजबूती मिलेगी। इससे सीमांत क्षेत्रों का विकास, पर्यटन को बढ़ावा, आपदा प्रबंधन क्षमता में वृद्धि तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होगी।
