Breaking News
मुख्यमंत्री धामी ने अभियान दल को किया फ्लैग ऑफ, ट्रेकिंग को सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ी पहल
राजेंद्र नगर में खुला सैमसंग का नया एक्सपीरियंस स्टोर, दूनवासियों को मिलेगा अत्याधुनिक तकनीक का हैंड्स-ऑन अनुभव
दिव्यांग बच्चों के संग मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बांटी जन्मदिन की खुशियां, बच्चों के साथ काटा केक
पत्रकार उत्पीड़न पर जर्नलिस्ट यूनियन सख्त, राष्ट्रपति-मानवाधिकार आयोग को भेजेगा पत्र
आठ दशक पुरानी किशाऊ परियोजना को मिली निर्णायक गति, छह राज्यों के बीच ऐतिहासिक MoU
आज घर-घर विराजेंगे गणपति: स्थापना के लिए 5 शुभ मुहूर्त, जानें बैठे और खड़े गणेश का महत्व
आपत्तिजनक वीडियो से ब्लैकमेलिंग का मामला, मुख्य आरोपी गिरफ्तार
यूआईआईडीबी को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर प्रमुख सचिव एवं यूआईआईडीबी एमडी श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम की मीडिया से बातचीत
स्कूलों में आपदा प्रबंधन की पुख्ता तैयारी, हर विद्यालय का बनेगा प्लान

अकेले महिलाओं को नहीं ठहराया जा सकता दोषी

अमेरिका की प्रजनन दर में 2023 के दौरान गिरावट दर्ज की गयी है। यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की ताजा रपट के अनुसार आस्ट्रेलिया में भी समान पैटर्न नजर रहा है। कह रहे हैं कि कोविड-19 महामारी के चरम के वक्त प्रजजन दर में अस्थाई वृद्धि देखी गयी थी। जिसे छोड़ कर अमेरिकी प्रजनन दर लगातार गिर रही है। इससे कम प्रजनन दर के मामले में जापान, दक्षिण कोरिया इटली हैं। अमेरिका आस्ट्रेलिया में इस वक्त प्रजनन दर 1.6 है। जबकि दक्षिण कोरिया में 0.68 रह गयी है।

इन देशों में जितने बच्चे जन्म रहे हैं, उससे ज्यादा मौतें हो रही हैं। असल सवाल महिलाओं के कम बच्चे पैदा करने पर जा अटकता है। यूं भी आस्ट्रेलियाई महिलाएं दुनिया में सबसे शिक्षित हैं। पढ़ाई को काफी वक्त देने के बाद वे करियर बनाने में जुट जाती हैं। बच्चे पालना महंगा तथा समय लेने वाली जिम्मेदारी है।

महिलाएं ही नहीं पुरुष भी स्थाई नौकरी आर्थिक सुरक्षा के प्रति जागरूक हो रहे हैं। अमीर देश ही नहीं, दुनिया भर के 204 देशों और क्षेत्रों में से 155 यानी 76त्न में 2050 तक प्रजनन दर जनसंख्या प्रतिस्थापन स्तर से नीचे पहुंच जाएगी। जनसंख्या को स्थिर बनाये रखने के लिए प्रति महिला 2.1 प्रजनन दर की आवश्यकता है। चूंकि अपने यहां इस वक्त उर्वर  यानी 18-35 की उम्र वालों की संख्या दुनिया में सबसे अधिक तकरीबन साठ करोड़ बतायी जा रही है।

विश्लेषकों का अनुमान है कि जनसंख्या 2064 में लगभ 9.7 अरब पहुंच सकती है। मगर 2100 में यह सिकुड़ कर 8.8 अरब पर थम सकती है। प्रजनन दर में आने वाली गिरावट के लिए अकेले महिलाओं को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। यह सच है कि बच्चों के लालनपालन में लगने वाले समय, ऊर्जा धन को लेकर मानदंड बलदते जा रहे हैं।

दूसरे देर से युवावस्था की ढलाने में हो रही शादियां प्रजनन क्षमता में होने वाली गिरावट/दिक्कतों की अनदेखी नहीं की जा सकती। बदलती जीवनचर्या, आर्थिक दबाव, करियर की बढ़ती मांगे, प्रतिस्पर्धा आदि ने युवाओं का जेहनी सुकून छीना है। बच्चों की देखभाल की उचित व्यवस्था का अभाव भी युवाओं को परिवार बढ़ाने से विमुख करता है। यह जटिल समस्या नहीं है, इसे लाइफ स्टाइल से जोड़ कर देखा जाना चाहिए और इसे सुधारने के प्रति सभी को आगे बढऩा चाहिए।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top