Breaking News
गृहमंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड में नव आरक्षियों को दिए नियुक्ति पत्र, 162 शरणार्थियों को मिला भारतीय नागरिकता प्रमाणपत्र
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बयान: केदारनाथ से कन्याकुमारी तक घुसपैठियों पर होगी कार्रवाई
देश विकास और सुशासन के नए अध्याय रच रहा है : मुख्यमंत्री धामी
देवभूमि उत्तराखंड पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह, जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर हुआ भव्य स्वागत
देहरादून में ओएनजीसी के आतिथ्य में पीएसपीबी बास्केटबॉल और वॉलीबॉल चैम्पियनशिप का आगाज़।
वित्त वर्ष 2024–25 में राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार ₹3,81,889 करोड़ रहा।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई व्यय-वित्त समिति की बैठक में विभिन्न विकास योजनाओं को स्वीकृति।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने नयार वैली फेस्टिवल का किया भव्य उद्घाटन
बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और रोजगार के लिए सरकार संकल्पबद्ध : मुख्यमंत्री

आसाराम को दुष्कर्म मामले में 31 मार्च तक अंतरिम जमानत मिली

नई दिल्ली। बाबा आसाराम को 2013 में हुए दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 31 मार्च तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी गयी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह अंतरिम जमानत मेडिकल के आधार पर दी गयी है।
बता दें कि बाबा आसाराम को अपनी ही गुरुकुल की एक छात्रा से यौन शोषण के मामले में दोषी पाया गया था और उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली थी। जिनका इलाज जोधपुर सेंट्रल जेल से भगत की कोठी स्थित आरोग्य चिकित्सा केंद्र में किया जा रहा है। उनके वकील के अनुसार आसाराम दिल के मरीज हैं और उन्हें पहले भी हार्ट अटैक आ चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत के दौरान यह भी आदेश दिया है कि पुलिसकर्मी आसाराम की निगरानी करेंगे और वह किसी भी तरह से सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे। इसके साथ ही, उन्हें अपने अनुयायियों से भी मिलने की अनुमति नहीं होगी। विदित हो कि आसाराम ने अपनी सजा को निलंबित कराने की भी कोशिश की थी। उन्होंने 2013 के बलात्कार मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जनवरी 2023 में सत्र न्यायालय ने आसाराम को दोषी ठहराते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, आसाराम ने अपनी याचिका में यह दावा किया था कि उन पर लगाए गए बलात्कार के आरोप झूठे थे और उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया था। आसाराम की अपील यह भी थी कि उसके खिलाफ दायर किए गए आरोप पूरी तरह से गलत हैं, और उसने इन आरोपों को चुनौती देने के लिए याचिका दाखिल की थी। 31 मार्च तक मिली अंतरिम जमानत उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए दी गई है, लेकिन यह जमानत केवल 31 मार्च तक है। यदि उनके स्वास्थ्य में सुधार नहीं होता है या कोई अन्य मामला सामने आता है, तो उनकी जमानत को आगे बढ़ाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि आसाराम को जमानत मिलने के बाद किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की कोशिश नहीं करनी चाहिए, जिन पर पुलिस निगरानी रखेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top