देशभर से 400 से अधिक विशेषज्ञ, शोधकर्ता और विद्यार्थी हाइब्रिड मोड में ले रहे हिस्सा
देहरादून। जल संसाधनों के वैज्ञानिक एवं टिकाऊ प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तहत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (ICAR-IISWC), देहरादून में सोमवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला ‘Integrated Water Resources Modeling and Basin Management Using MIKE Hydro Basin’ का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला का आयोजन 7 एवं 8 सितंबर 2026 को ICAR-IISWC, स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA), देहरादून और DHI India के संयुक्त तत्वावधान में जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के INCCC प्रोजेक्ट के अंतर्गत किया जा रहा है।
कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से 400 से अधिक विशेषज्ञ, शोधकर्ता, संकाय सदस्य और विद्यार्थी ऑनलाइन एवं ऑन-साइट हाइब्रिड मोड के माध्यम से प्रतिभाग कर रहे हैं। इनमें हाइड्रोलॉजिस्ट, GIS विशेषज्ञ, पर्यावरण वैज्ञानिक और विभिन्न शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हैं।
आधुनिक तकनीक से मजबूत होगा जल प्रबंधन
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को MIKE Hydro Basin सॉफ्टवेयर के माध्यम से जल संसाधन प्रबंधन और बेसिन प्लानिंग की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है। प्रशिक्षण में GIS डेटा प्रोसेसिंग, हाइड्रोलॉजिकल सिमुलेशन, मॉडल सेटअप, इनपुट डेटा तैयार करना, मॉडल कैलिब्रेशन एवं वैलिडेशन, परिदृश्य विश्लेषण तथा निर्णय समर्थन प्रणाली जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभावों का आकलन और भविष्य की परिस्थितियों के अनुरूप जल संसाधन प्रबंधन की रणनीति तैयार करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
कार्यशाला के आयोजन अध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक (SWCE) डॉ. अमरीश कुमार ने स्वागत संबोधन में कार्यशाला के उद्देश्यों और उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आधुनिक मॉडलिंग और वैज्ञानिक डेटा आधारित तकनीकों का प्रभावी इस्तेमाल जल संसाधनों के बेहतर नियोजन और दीर्घकालिक प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इस अवसर पर संयुक्त निदेशक जलागम डॉ. ए.के. डिमरी, उप निदेशक SARRA डॉ. डी.एस. रावत, संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वेंकटेश, डॉ. उदय मंडल और डॉ. रमा पाल समेत अनेक वैज्ञानिक, विशेषज्ञ एवं गणमान्यजन मौजूद रहे।
हिमालयी नदियों से लेकर भूजल पुनर्भरण तक चर्चा
कार्यशाला के प्रथम दिन राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (NIH), रुड़की के पूर्व वैज्ञानिक ‘जी’ एवं अध्यक्ष डॉ. आर.पी. पांडे ने भारतीय हिमालयी क्षेत्र में नदियों के पुनरुद्धार की रणनीतियों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर व्याख्यान दिया। उन्होंने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए नदी पुनरुद्धार के लिए वैज्ञानिक एवं समेकित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया।
इसके बाद DHI India की विशेषज्ञ टीम ने प्रतिभागियों को MIKE Hydro Basin सॉफ्टवेयर, प्रोजेक्ट इनिशियलाइजेशन और इसके विभिन्न टूल्स की जानकारी दी। NIH रुड़की के वैज्ञानिक ‘सी’ डॉ. अजय अहिरवार ने मॉडल सेटअप एवं आवश्यक इनपुट डेटा तैयार करने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
प्रतिभागियों को मॉडल सिमुलेशन, कैलिब्रेशन एवं वैलिडेशन के साथ वास्तविक डेटा पर Hands-on Exercises के माध्यम से तकनीकी दक्षता विकसित करने का अवसर भी मिल रहा है।
जल संकट के समाधान में आधुनिक मॉडलिंग पर जोर
कार्यशाला में बेसिन प्रबंधन के लिए Scenario Analysis और प्रभावी नीति एवं योजना निर्माण में Decision Support System के उपयोग पर भी विस्तार से चर्चा की जा रही है। वहीं CSSRI करनाल के पूर्व निदेशक डॉ. एस.के. कामरा द्वारा ‘Water Positive Landscape’ विकसित करने के लिए भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के डिजाइन, उपयुक्त स्थल चयन और प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेषज्ञ विचार साझा किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती जल मांग, जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच केवल पारंपरिक जल प्रबंधन उपाय पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में डेटा आधारित मॉडलिंग, वैज्ञानिक विश्लेषण और आधुनिक निर्णय समर्थन प्रणालियां भविष्य की जल नीति और बेसिन प्रबंधन में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला वैज्ञानिक संस्थानों, नीति-निर्माताओं, जल विशेषज्ञों और युवा शोधकर्ताओं के बीच तकनीकी ज्ञान एवं अनुभव साझा करने का प्रभावी मंच बन रही है। इससे हिमालयी एवं अन्य नदी बेसिनों के समेकित प्रबंधन, जल सुरक्षा, भूजल पुनर्भरण, नदी पुनरुद्धार और जलवायु परिवर्तन के अनुरूप जल संसाधन रणनीतियां विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
