देहरादून: उत्तराखंड के सतत और वास्तविक विकास के लिए पर्वतीय गांवों तक मजबूत स्वास्थ्य एवं शिक्षा अवसंरचना और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है। गांवों में बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका के अवसर उपलब्ध होंगे तो पलायन पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी। यह बात अवस्थापना विकास सलाहकार, सेतु आयोग के सलाहकार दिनेश अग्रवाल ने सोमवार को सचिवालय मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में कही।
दिनेश अग्रवाल ने कहा कि सेतु आयोग नीतिगत सुधारों के प्रस्ताव तैयार करते समय जमीनी तथ्यों और वास्तविक जरूरतों को प्राथमिकता दे रहा है। आयोग की ओर से अर्थव्यवस्था एवं कौशल, अवसंरचना एवं कल्याण, शहरी एवं उप शहरी विकास, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन तथा डेटा एनालिटिक्स जैसे पांच प्रमुख क्षेत्रों में काम किया जा रहा है।
17 एकीकृत स्मार्ट ग्राम केंद्रों पर काम
उन्होंने बताया कि अवसंरचना एवं कल्याण के क्षेत्र में पांच जिलों में 17 एकीकृत स्मार्ट ग्राम केंद्र स्थापित करने की दिशा में काम चल रहा है। इसके अलावा देहरादून में जेईई उत्कृष्टता केंद्र, कुमाऊं विश्वविद्यालय के हॉस्पिटैलिटी कौशल केंद्र में शत-प्रतिशत प्लेसमेंट, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, एनीमिया और स्टंटिंग जैसी समस्याओं पर लक्षित हस्तक्षेप तथा एम्स ऋषिकेश के सहयोग से ट्रॉमा केयर और टेलीमेडिसिन व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
रोजगार और कौशल विकास पर भी फोकस
अर्थव्यवस्था एवं कौशल विकास के तहत उत्तराखंड बायोएनर्जी नीति-2026, वन पंचायत नियमावली-2026 और सहकारिता नीति-2026 के प्रारूपण पर काम किया जा रहा है। साथ ही डिजिटल एवं फ्यूचर स्किल्स को बढ़ावा देने, राज्य के 119 महाविद्यालयों में एम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स विकसित करने और किसानों की बाजार तक पहुंच मजबूत करने की दिशा में भी पहल की जा रही है।
शहरी विकास के लिए नए कानून का प्रस्ताव
तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए नगरीय स्थानीय निकायों को अधिकारों के हस्तांतरण को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने और प्रदेश के लिए नए शहरी अधिनियम का प्रारूप तैयार करने पर भी आयोग काम कर रहा है। इसका उद्देश्य शहरों में नियोजित विकास और बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
योजनाओं के मूल्यांकन पर जोर
दिनेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना, अमृत सरोवर योजना, सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का विश्वविद्यालयों की भागीदारी से मूल्यांकन शुरू किया गया है। इसके साथ ही ‘विकसित उत्तराखण्ड-2047’ के लिए व्यापक इंडिकेटर फ्रेमवर्क तैयार किया गया है, जिसे राज्य सरकार द्वारा अपनाए जाने की प्रक्रिया चल रही है।
‘एक पहचान, अनेक समाधान’ पर आधारित डेटा नीति
डिजिटल सुशासन को लेकर उन्होंने बताया कि राज्य डेटा शासन नीति तैयार की जा रही है। इसका मार्गदर्शक सिद्धांत ‘एक पहचान, अनेक समाधान’ रखा गया है। इससे नागरिकों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को बार-बार दस्तावेजी औपचारिकताओं से राहत मिलने के साथ डिजिटल सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुगम बनाने में मदद मिलेगी।
दिनेश अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने आयोग के समक्ष विशेष रूप से पर्वतीय गांवों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं पहुंचाने को विकास की प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान देने का सुझाव रखा है। उन्होंने कहा कि गांवों में बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के अवसर उपलब्ध होने से युवाओं को अपने गांव में ही बेहतर भविष्य की संभावनाएं मिलेंगी और पलायन रोकने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि सेतु आयोग की प्रगति पर वे लगातार नजर रखेंगे, ताकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘विकसित उत्तराखण्ड’ के संकल्प को साकार करने में आयोग राज्य सरकार को प्रभावी सहयोग दे सके। प्रेस वार्ता में निदेशक नियोजन मनोज पंत, विशेषज्ञ विशाल पराशर और हनुमंत रावत भी मौजूद रहे।
