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अंकिता भंडारी मर्डर में दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई

  •  जिला न्यायालय एवं कोटद्वार सत्र का फैसला
  • तीनों आरोपियों को ठहराया गया दोषी
  • पुलकित पर 72 हजार, सौरभ व अंकित पर 62 हजार जुर्माना

कोटद्वार। बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में आज अपर जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हे उम्र कैद की सजा सुनाई गई है तथा तीनों ही आरोपियों पर आर्थिक दंड भी तय कर दिया गया है।
एडीजे बीना नेगी की अदालत ने आज इस मामले के तीनों आरोपियों पुलकित आर्य, अंकित गुप्ता और सौरभ भारद्वाज को दोषी ठहराते हुए उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई गई तथा पुलकित आर्य पर 72 हजार और अंकित तथा सौरभ पर 62 हजार का अर्थ दंड भी लगाया गया है। दो साल और आठ माह चली लंबी सुनवाई के बाद आज अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया है। इस सनसनीखेज आपराधिक मामले ने उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल ला दिया था क्योंकि मृतका अंकिता भंडारी (19 वर्ष) ऋषिकेश के जी वंनत्रा रिजार्ट में रिसेप्शनिस्ट पद पर कार्य करती थी वह भाजपा नेता विनोद आर्य का था तथा इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी उसका बेटा पुलकित आर्य था जो इस रिजार्ट का संचालन करता था यही नहीं अंकिता भंडारी की हत्या किए जाने के पीछे एक वीआईपी को स्पेशल सर्विस प्रोवाइड कराये जाने के लिए दबाव बनाने की बात भी सामने आई थी जिस वीआईपी को यह स्पेशल सर्विस देने की बात चर्चाओं के केंद्र में रही वह भी भाजपा का एक बड़ा नेता बताया जाता है जिसका नाम केस डायरी में नहीं है।
सितंबर 2022 की इस घटना में पुलकित आर्य अपने दो रिजार्ट कर्मियों अंकित और सौरभ के साथ दो पहिया वाहनों से अंकिता को रिजार्ट से बाहर ले जाते हैं तथा चीला नहर में फेंक देते हैं आरोपियों की निशानदेही पर अंकिता का शव 4—5 दिन बाद बरामद किया जाता है इस मामले में पुलिस ने पुलकित सौरभ व अंकित को गिरफ्तार किया गया तथा उन पर धारा 302, 201, 120 बी तथा 354 के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में बीते साल पुलिस द्वारा 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई। कोर्ट में इस मामले की सुनवाई में 2 साल 8 माह का समय लगा तथा 97 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। जिसके आधार पर आज कोटद्वार सत्र न्यायालय ने आरोपियों को सजा की घोषणा की गई।
इस मामले में आज फैसला आने की संभावना के आधार पर कोर्ट में कड़ी सुरक्षा की व्यवस्था की गई थी 200 मीटर के दायरे में अधिवक्ताओं के अतिरिक्त किसी को जाने की अनुमति नहीं दी गई जैसे ही आरोपियों को कोर्ट में लाया गया सुरक्षा कर्मियों ने मोर्चा संभाल लिया था। पुलिस को इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ा क्योंकि वह आरोपियों को फांसी की सजा की मांग कर रहे थे।

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