Breaking News
चकराता में तीन दिवसीय ‘विकसित भारत–ग्रामीण’ आउटरीच कार्यक्रम का समापन
लखपति दीदी सम्मेलन में पर्यटन मंत्री पर्यटन मंत्री श्री सतपाल महाराज जी ने 48 महिलाओं को किया सम्मानित
ग्रोथ सेंटर्स को बाजार और निजी साझेदारी से जोड़ने पर जोर, मुख्य सचिव ने दिए अहम निर्देश
रौद्र हुई बारिश: अलकनंदा-मंदाकिनी उफान पर, बदरीनाथ-केदारनाथ हाईवे पर भूस्खलन से बढ़ी मुश्किलें
भारी बारिश का असर: चारधाम यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित, उत्तराखंड के 11 जिलों में स्कूल और आंगनबाड़ी बंद
भारी वर्षा को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अलर्ट, अधिकारियों को राहत-बचाव कार्यों के निर्देश
कोटद्वार में ‘वीर सैनिक सम्मान समारोह’ आयोजित, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने वीर सैनिकों और शहीद परिवारों का किया सम्मान
उत्तराखंड में हवाई कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा विस्तार, पराग फार्म में बनेगी एविएशन एकेडमी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने की शिष्टाचार भेंट

हाईकोर्ट ने बॉबी पंवार को दिखाया बाहर का रास्ता

*सस्ती राजनीति करने वालों पर न्यायालय हुआ सख्त*

*समाधान के लिए नहीं, ख़बरों के लिए लगा रहे हैं PIL*

बॉबी पंवार नाम सुनते ही अब लोगों को आंदोलन, झूठे आरोप, और सस्ती राजनीति की याद आने लगी है। इस बार उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के नाम पर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने दो टूक कह दिया – “ये जनहित नहीं, ‘पैसा वसूल’ याचिका है!”

उच्च न्यायालय द्वारा बॉबी पंवार की जनहित याचिका (PIL) को खारिज किया जाना न सिर्फ कानूनी रूप से एक बड़ा झटका है, बल्कि यह उनके राजनीतिक स्टंट और सस्ती लोकप्रियता की असलियत को भी उजागर करता है। हैरानी की बात यह है कि कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि बॉबी पंवार की याचिका में कोई निष्कलंक मंशा नहीं है। इतना ही नहीं, अदालत ने यह भी कहा कि यह मामला पहले से ही राज्य सरकार द्वारा जाँच के बाद बंद किया जा चुका है और अगर बॉबी को वास्तव में कोई शिकायत है तो उन्हें निचली अदालत में जाना चाहिए, न कि सीधे हाईकोर्ट में।

क्या बॉबी को नहीं पता कि भारतीय न्याय व्यवस्था में हर स्तर पर एक प्रक्रिया होती है? लोग ये भी पूछ रहें हैं कि क्या बॉबी जानबूझकर सिर्फ हाईकोर्ट की मीडिया हेडलाइन पाने के लिए सीधे वहाँ पहुँचे? यह वही बॉबी पंवार हैं जो पहले भी युवाओं को भड़काकर सड़कों पर आंदोलन करवाते हैं, और जब कोई अधिकारी या संस्था उनकी मनमानी में साथ नहीं देती, तो उस पर झूठे आरोप और ब्लैकमेलिंग के हथकंडे अपनाते हैं।

क्या बॉबी पंवार को न्यायपालिका पर भरोसा नहीं है? या फिर यह पूरा ड्रामा सिर्फ अपनी राजनीतिक चमक को बनाए रखने के लिए किया गया शिगूफ़ा था? हाईकोर्ट ने उन्हें न सिर्फ सही मंच (trial court) का रास्ता दिखाया, बल्कि उनकी मंशा पर भी सवाल खड़े किए। साफ है कि बॉबी पंवार का यह प्रयास जनहित नहीं, निजी स्वार्थ और पब्लिसिटी स्टंट था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top