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घोड़े—खच्चर बीमार होने से यात्री परेशान

देहरादून। चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के तमाम दावों के बीच यात्रियों को प्रारंभिक दौर में ही कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। धामों में उमड़ती भीड़ को टोकन सिस्टम से दर्शन कराने की जो व्यवस्था की गई थी वह यात्रियों की परेशानी का कारण बन रही है। वहीं घोड़े खच्चरों के स्वास्थ्य परीक्षण के बाद भी उनमें एक्वाइन इनफ्यूऐंजा (कोरोना) कोरोना जैसी बीमारी के कारण भी यात्रियों को परेशानी हो रही है क्योंकि बीमार घोड़े खच्चरों को क्वॉरेंटाइन कर दिया जाता है।
जो यात्री यमुनोत्री तथा गंगोत्री और केदार धाम की कठिन पैदल चढ़ाई नहीं चढ़ कर सकते हैं उन्हें धामों तक पहुंचाने और धामों में रसद की आपूर्ति का काम भी इन घोड़े खच्चरों पर ही निर्भर होता है। सरकार द्वारा इसके लिए 43 सौ घोड़ा खच्चर संचालकोे तथा 8 हजार घोड़े खच्चरों का रजिस्ट्रेशन किया गया था इन घोड़े खच्चरों का बाकायदा स्वास्थ्य परीक्षण कर फिटनेस सर्टिफिकेट भी दिया गया था लेकिन यात्रा शुरू होने के दो—तीन दिन बाद ही एक दर्जन से अधिक घोड़े खच्चरों में एक्वाइन इन्फ्यूऐंजा नामक संक्रामक बीमारी के मिलने के बाद इन्हें क्वॉरेंटाइन कर दिया गया लेकिन यह बीमारी अभी भी पीछा नहीं छोड़ रही है। सरकार भले ही इन्हे 15 दिन के लिए क्वॉरेंटाइन कर मुक्त इलाज दिया जा रहा है लेकिन लगातार बीमार होते घोड़े खच्चरों के कारण यात्रियों की समस्याए बढ़ती जा रही है।
बात अगर केदार धाम की करें तो सोनप्रयाग से 18 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पैदल चलना हर किसी के बूते की बात नहीं है। केदार धाम के लिए 5000 तथा यमुनोत्री धाम के लिए 3000 घोड़े खच्चरों को पंजीकृत किया गया था किंतु अब इनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है। जिससे यात्री परेशान है उधर केदारधाम में टोकन से दर्शन कराने की व्यवस्था भी बिगड़ चुकी है। टोकन लेने के बाद भी लोगों को घंटो लाइनों में खड़े रहना पड़ रहा है फिर भी दर्शन नहीं हो पा रहे हैं तथा उन्हें फिर अगले दिन लाइन में लगना पड़ रहा है। धामों में घोड़े खच्चरों के बीमार होने से खाघ सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। जो हजारों यात्री धामों तक पहुंचने के लिए हर रोज घोड़े खच्चरों पर निर्भर रहते है वह इस व्यवस्था से परेशान है। बीमार घोड़े खच्चरों के ठीक होने में 15 से 20 दिन का समय लग जाता है।

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