देहरादून। सचिवालय में आयोजित बैठक में श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान, ऋषिकुल (हरिद्वार) के समग्र विकास और विस्तार की योजनाओं की समीक्षा की गई। इस दौरान संस्थान को भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन विज्ञान, संस्कृति और आधुनिक शोध के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि संस्थान का कार्य जल्द शुरू कर आगामी कुंभ से पहले पूरा किया जाए। साथ ही राज्य के सभी जनपदों की लोक कला पर आधारित गतिविधियों को भी इसमें शामिल करने पर जोर दिया गया।

संस्थान में वैदिक गणित, वेद-विज्ञान, उपनिषद दर्शन, भारतीय तर्कशास्त्र, पर्यावरण विज्ञान और जीवन मूल्यों पर आधारित आधुनिक शोध व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके अलावा डिजिटल पांडुलिपि संरक्षण, आधुनिक पुस्तकालय, शोध प्रयोगशालाएं और ई-लर्निंग सुविधाएं विकसित कर इसे शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने के निर्देश भी दिए गए।
सरकार की योजना के तहत संस्थान को भारतीय विद्या की विभिन्न शाखाओं के गहन अध्ययन के साथ-साथ पर्यटन, आयुर्वेद, ज्योतिष और योग शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा।
