खटीमा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को खटीमा में आयोजित थारू जनजाति संवाद कार्यक्रम में भाग लेकर थारू समाज के प्रतिनिधियों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने समाज की समस्याएं, सुझाव और अपेक्षाएं सुनीं तथा कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बीएसएफ के एवरेस्ट विजेता मोहन सिंह राणा और आईटीबीपी के एवरेस्ट विजेता टीला सेन को सम्मानित भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून लागू किया है और अवैध धर्मांतरण करने वालों के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार नशामुक्त उत्तराखंड के संकल्प के साथ व्यापक जनजागरूकता अभियान चला रही हैं।
उन्होंने कहा कि थारू समाज के साथ उनका रिश्ता वर्षों पुराना है और खटीमा से उनका आत्मीय जुड़ाव हमेशा बना रहेगा। यह संवाद केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सरकार और जनजातीय समाज के बीच विश्वास और विकास की साझेदारी को मजबूत करने का माध्यम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार जनजातीय समाज के सशक्तिकरण को राष्ट्रीय प्राथमिकता मिली है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का जनजातीय समाज से होना इस सोच का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं के माध्यम से जनजातीय समाज को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
आवास और शिक्षा पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि अटल आवास योजना में आय सीमा को व्यावहारिक बनाया गया है तथा मकान निर्माण की लागत भी बढ़ाई गई है। उधम सिंह नगर में इस योजना के तहत लगभग 3 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। वहीं प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत जिले में पहले चरण में 824 और दूसरे चरण में 101 आवासों का निर्माण किया गया है।
उन्होंने बताया कि जनजातीय कल्याण विभाग के माध्यम से आश्रम पद्धति विद्यालयों, छात्रावासों और आईटीआई संस्थानों के विकास के लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत किए गए हैं। खटीमा में बालिका छात्रावास के लिए 4 करोड़ रुपये, बाजपुर में विद्यालय और छात्रावास निर्माण के लिए 16 करोड़ रुपये से अधिक तथा गदरपुर में 100 बेड के बालक छात्रावास का निर्माण कराया जा रहा है। थारू राजकीय इंटर कॉलेज में खेल मैदान के सौंदर्यीकरण, ऑडिटोरियम के आधुनिकीकरण और भवन मरम्मत के लिए भी 2 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं।
महिलाओं के सशक्तिकरण और सीमांत क्षेत्रों के विकास पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और वन धन केंद्रों के माध्यम से जनजातीय महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। महिलाओं को 1 करोड़ रुपये से अधिक की चक्रीय निधि और 8 करोड़ रुपये से अधिक की निवेश सहायता उपलब्ध कराई गई है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत वर्ष 2020 से 2025 के बीच 10 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास योजनाएं पूरी की गई हैं। इसके अलावा हजारों परिवारों को पेयजल, बिजली और गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। सितारगंज में थारू विकास भवन का निर्माण भी कराया जा रहा है।
“घोषणाएं नहीं, धरातल पर विकास हमारा लक्ष्य”
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केवल योजनाओं की घोषणा नहीं करती, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारकर वास्तविक बदलाव लाने का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के विकास को गति देने के लिए उधम सिंह नगर, देहरादून, पिथौरागढ़ और चमोली में अलग-अलग जनजाति कल्याण अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।
उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का ऐतिहासिक निर्णय लेकर जनजातीय समाज को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि थारू समाज की हर समस्या, हर सुझाव और हर अपेक्षा राज्य सरकार की प्राथमिकता रहेगी।
कार्यक्रम के दौरान थारू समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए समाज के विकास और संस्कृति संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
