- आईजी के कहने पर मुकदमा दर्ज
- पुलिस की घोर लापरवाही का नतीजा 12 दिन तक भटकता रहा पीडित परिवार
देहरादून। युवक की संदिग्ध स्थित में मौत के मामले में 12 दिन तक पीडित पक्ष मुकदमा दर्ज कराने के लिए भटकता रहा जिसके बाद आईजी के हस्तक्षेप के बाद मुकदमा दर्ज किया गया। यह पुलिस की घोर लापरवाही का ही नतीजा है।
उल्लेखनीय है कि इन्द्रेश नगर निवासी युवक प्रणव उर्फ हर्षित को कुछ लोग घायल अवस्था में इन्द्रेश हास्पिटल लेकर गये थे जहां पर चिकित्सकों ने उसको मृत घोषित कर दिया। जिसकी सूचना मिलते ही मृतक के परिजन मौके पर पहुंचे। अगले दिन युवक के पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार किया। जिसके बाद शाम के समय मृतक के परिजन पटेलनगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराने पहुंचे। पीडित पक्ष का आरोप है कि जब वह पटेलनगर कोतवाली पहुंचे तो वहां पर मौजूद कोतवाल चन्द्रभान सिंह अधिकारी ने उनकी रिपोर्ट दर्ज करने से साफ इंकार कर दिया और इस घटना को दुर्घटना बताकर उनको वहां से चलता कर दिया। उनका आरोप है कि वह कई दिनों तक पटेलनगर कोतवाली के चक्कर लगाते रहे लेकिन पटेलनगर कोतवाल ने मुकदमा दर्ज करने से इंकार कर दिया। जिसके बाद वह आईजी के पास गये तो आईजी ने मामले की गम्भीरता को देखते हुए फोन पर ही पटेलनगर कोतवाल को खरी खोटी सुनायी और मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिये और मामले की जांच सीओ प्रेमनगर को सौंप दी। पीडित पक्ष का कहना है कि उनके बच्चे की मौत के बाद पटेलनगर कोतवाल ने कोई गम्भीरता नहीं दिखायी और उल्टे उनसे ही अभद्रता की गयी। जिसके बाद से उनका समाज पूरी तरह से आव्रQोशित दिखायी दे रहे हैं। उनका साफ कहना है कि कोतवाल के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाये और उसको उसके पद से हटाया जाये। अगर ऐसा नहीं होता है तो वह अपने समाज के साथ सडकों पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होगे और उग्र आंदोलन पटेलनगर कोतवाल के खिलाफ किया जायेगा। इस को लेकर गत दिवस कैडिल मार्च भी निकाला गया था। इस पूरे मामले में पुलिस की घोर लापरवाही को देखते हुए आईजी ने भी गम्भीरता से लिया है। लेकिन पीडित पक्ष का साफ आरोप है कि कोतवाल चन्द्रभान अधिकारी ने इस मामले को दबाने का प्रयास किया है। इसकी भी जांच होनी चाहिए कि किस दबाव व कारणों से चन्द्रभान अधिकारी ने मुकदमा दर्ज नहीं किया।
